Friday, June 17, 2016

B.S.Sharma . Bhirguvnshiyo ki suchi -- Gotrkaar - mntrkaar ityaadi .

वैदिक साहित्य में आये हुए भृगुवंशी ब्राह्मणो की सूचि निम्नानुसार  है , जो की मंत्रकार ,गोत्रकार तथा प्रवर थे। :::::::::::
१. अत्र - भरगु पुत्र
२. अधिपति भरगु पुत्र
३. अनंत भागिन -भर्गु  गोत्रकार
४. अनानत प रूच्चेपी -दिवोदास के पुत्र परुच्छेप का
   पुत्र -सुक्क्त दृस्ता
५. अनुमति भर्गु कुल गोत्रकार.
६. अन्त्य (अन्य ) धर्गु पुत्र
७. अन्त्या पण (अन्यायत) भर्गु पुत्र
८. अपीशी ,अपिश्ली ,भर्गु कुल गोत्रकार
९. अप्नवान - च्वयन के पुत्र। इनकी पत्नी
    रूचि थी
१०. अभ्याग्नि एतशयन - भरगुवंशीय इट्स से संबंधित है
अग्नेराने मंत्रो को द्र्स्ट किया था ,जब ये इनका गठन कर
रहे थे , तब पुत्रो में से अभ्यगनि ने आक्रिंके मुख पर हाथ
रख दिया , और कहा की मेरे पिता पागल हो गए है। इस
पर क्रुद्ध होकर अभ्याग्नि एसिशयनो की पापिस्ट होने का
श्राप दिया।
११. अरूप -भरगु गोत्रीय म्नलकार
१२. अध्य्य -भरगु पुत्र
१३. असकृत भरगु गोत्र कर्ता
१४. आपस्तम्ब -कश्यप। ऋषि द्वारा कराये हुए पुत्र कॉमेस्टी यग में आचार्य थे।  इनकी पत्नी का नाम
      अक्षसूचा ,पुत्र का नाम कर्की था।  इनके नाम पर अनेक ग्रंथो का उल्लेख है ,जिनमे बहुत से उपलब्ध है।
१५. आपस्तंत्रि -भरगु कुल गोत्रकार
१६। आपिशली - प्राचीन ,व्याकरणाचार्य थे. इनका नाम प्राशिने ने उल्लेख किया है।
१७. . असतिषेण -परवरकार थे, ऋषि एवं मंत्रकार में से थे।  तपस्या द्वारा सिद्द्धि प्राप्त हुई।  ये शल के पुत्र         एवं सुहोत्र के पौत्र थे।  इनका संबंध शौनक और गुत्श -मद से था।  ऋष्टिषेण के पुत्र थे , इनके वंश
        का देवापि आर्शितशेन ऋग्वेद का मंत्र द्रष्टा था।
१८. आवेद ( आचाज ) गोत्रकार
१९।  आलूकी ऋषि
२०. आश्चयनि - ऋषि    २१, इट -भार्गव - सुक्तद्रष्टा
२२.  इन्द्रोत देवाप  शौनक -यह कुल नाम है।  यज्ञ में पुरोहित का कार्य किया था। जनमेजय कप ब्रह्म
       हत्या पाप से मुक्त करवाया था।  महाभारत में धर्मोपदेशक के रूप में आये है।
२३. उन्नत -द्युतिमान का पुत्र
२४. उपरिमंडल ( परिमंडल ) गोत्रकार।    २५- उभयजात -गोत्रका   २७. ऋचीक मंत्रकार
२९. एकायन  गोत्रकार     ३०. एतश -भरगुकूल की ओरवशाखा से संबंध है।
३१. एलिक  गोत्रकार
३२. ओर्व(  ऋचीक )  ऋषि प्रवर ,मंत्रकार ,इनके तेज से हैयय अंधे हो गए थे।  इनके क्रोध को जल में स्थित
     कर दिया गया , जिसने वडवानल का रूप धारण किया।
३३. जिर्वेय - ऋषि   ३४.  ओशन्स -उशनस् (शुक्र ) के पुत्र   ३५. क्तायनी -गोत्रकार
३६. कपि - गोत्रकार।  ३७. ---कवि  भरगु पुत्र  ३८.  कांचन - चयवन भार्गव का नामांतर
३९. कायनी गोत्रकार  ४०.  कार्डेमायनि ऋषि  ४१. कार्याणि -(पाशिगी-गोत्रकार)
४२. काश्य - मंत्रकार   ४३. काश्यपि - गोत्रकार  ४४.  कुत्स - गोत्रकार  ४५. कूर्म -गात्रस्मद शुक्त द्रष्टा
४६. क्रत्नु भार्गव -मुक्त इष्टा  ४७- कोगाशी ( सकोरा ) गोत्रकार ४८. काउछस्ति -गोत्रकार
४९. कोठभि -अर्थशस्त्रकार कौटिल्य भरगु गोत्रीय थे -गोत्रकार  ५०. कौत्स -गोत्रकार
५१. कौश्पी -- ५२-कौशी   ५३- ऋतू -भरगु पुत्र  ५४. खांडव  ५५- चुभ्य -गोत्रकार ५६.  गावन
५७. गर्मीय   ५८- गार्गापन  ५९. गार्द्धभि -ऋषि   ६०. घाही यण -गोत्रकार
६१. गुत्स्मद - गोत्रकार ,परवरकार , मंत्रकार तथा सूक्तद्र्स्ट  थे - इन्होने तपस्या की , इंद्र के समान
     तेजश्वी शरीर बनाकर  द्युलोक को व्याप्त किया। इंद्र समझ कर धुनि और च्सुदी दैत्यों ने शस्त्र उठाये
     तब इन्होने वास्तविक इंद्र के स्वरूप का परिचय करने के लिए ऋग्वेद का २-१२ शुक्त लिखा।  इंद्र ने
     मौका पाकर दैत्यों को मार डाला और परसन होकर गुत्स्मद को अक्षय तपस्या का वरदान दिया , और
     कहा ,तुम्हारी प्रार्थना से हम प्रश्न है , अत: तुम्हारा नाम गुत्स्मद शोनहोत्र होगा , गुत्स का अर्थ
     प्राण और मद का अर्थ अमां है।  . ६२. गोस्टाइन - गोत्रकार  ६३. ग्राम्या -यनि  - गोत्रकार
६४. चण्ड - भार्गव --- इनका जन्म चयवन मुनि के वंश में हुआ था।  उस समय के विख्यात कर्मकांडी थे
      सर्पो के यज्ञ के समय जनमेजय के यज्ञ में यज्ञवाद वेताओ में श्रेस्ट ब्राह्मण वंड भार्गव हेतु।
६५. चल कुण्डल -गोत्रकार  ६६. चली गोत्रकार  ६७.  धृत्वि गोत्रकार  ६८. चोदरम्सी गोत्रकार
६९. चौक्षी -नोत्रकार  ७०. चयवन -मंत्रकार  ७१. जयदग्नि -मंत्रकार ,प्रवर
७२. जवीन - गोत्रकार  ७३. जवाली गोत्रकार  ७४. जालधि -गोत्रकार ७५.  जिहब्क - गोत्रकार
७६.  जेवतनयायनी गोत्रकार ७७. त्याज्य - भरगु पुत्र  ७८. तिथि  गोत्रकार
७९. त्रिशिरा - त्वष्टा के पुत्र सूक्त दृष्ट्या
८०।  त्वष्टा - शुक्र और गो के पुत्र थे।  यशोधरा ,वेरोचिनी , इनकी पत्नी थी।
८१. दक्ष - भरगु पुत्र  ८२. दाडिन - गोत्रकार ८३. दध्यच (दधचि ,दधीचि ) मंत्रकार
८४. दम - गोत्रकार  ८५. दिवोदास - ऋषि प्रवर। ८६.  देवपति-गोत्रकार
८७.  देवयानी - शुक्राचार्य जी की पुत्री ८८.  दर्शान भार्गव - मन्त्रदस्ट्
८९. देवापि आर्ष्टि शेण -मन्त्रद्रस्ता  ९०. द्युतिमान -भरगुकूल के ख्याति वंश में उतपन पांडुपरन का पुत्र
९१.  दोनयन - गोत्रकार ९२।  दिवगत भार्गव -शाम पठन करने के कारण स्वर्ग को प्राप्त हुए।
९३. धाता -भरगु की पत्नी ख्याति का पुत्र , इनकी पत्नी भेरू , कन्या आयति थी।
९४. नडायन (नवप्रभ) - गोत्रकार ९५।  नभ - गोत्रकार ९६. नाकुली. - गोत्रकार ९७.  नितिन -गोत्रकार
९८. नील - गोत्रकार  ९९. नैतिश्य - गोत्रकार
१००. नेम भार्गव - शुक्त दृष्टया
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१०१. नेक - जिहदु -गोत्रकार १०२. नैकशी -गोत्रकार
१०३.  परशुराम (जामदग्न्य ) चिरंजीवी विष्णु अवतार १०४।  पॄच्छेप देवोदासि -मंत्रकार सूक्त सुकदृष्ट्ता
१०५. पश्वास्य (पथ्यस्व )- मंत्रकार  १०६.  पाण्डोरोची - गोत्रकार
१०७. पिप्लाद - यह अंग्रिशि मंत्रो का प्रयोग करते थे।  अत: आग्रिश कहलाते थे।  इनके पिता दधीचि थे
        देवताओ ने वज्र निर्माण के लिए दधीचि की हड्डिया मांगी , जो उनको दे दी गई।  इनकी माता ने
        पति की इस अवस्था को देखकर अपने गर्भ को निकाल कर पीपल के वृक्ष के निचे रख दिया , व्ही
        इस बालक का पालन पोषण हुआ।  इससे इनका नाम पिप्लाद पद गया।  ये दर्शन के छेत्र में
        अग्रणी थे।
१०८. पिली- गोत्रकार  १०९। पूर्णिमा गतिक  - गोत्रकार
११०. पृथु - मंत्रकार और शुक्त द्र्स्तता।  वेन पुत्र पृथु (वैन्य ) भार्गव वंश से संबंधित थे
१११. प्रथुरश्मि - वृति के पुत्र   ११२.  पीर - गोत्रकार  ११३.  पौलश्य - गोत्रकार
११४. पोष्येण - गोत्रकार  ११५. प्रचेता - मंत्रकार और शुक्त द्रष्टा ११६. प्रत्यूह (प्रत्यह ) गोत्रकार
११७. प्रमव (प्रभव ) - भरगु पुत्र
११८. प्रगति - चयवन के पुत्र।  इनकी पत्नी (धरतली) धृताची थी।  इसके गर्भ से रुरु नामक पुत्र हुआ।
११९. प्रयाग भार्गव - सूक्त द्रष्टा १२०. प्राण (पाण्डु) भरगु ख्याति पुत्र विधाता का पुत्र।  इनकी पत्नी
        पुण्डरीका थी।
१२१. फेनप (फेनब). गोत्रकार  १२२.  बाध्यस्व (व्द्धर्शव ) १२३. बल्कि - गोत्रकार
१२४. वाळवी। गोत्रकार   १२५.. विल्वी - गोत्रकार १२६। वृहद्गिरा - शुक्र कुल में उतपन वरुणी का पुत्र
१२७. वेजमरत - मंत्रकार  १२८. ब्रह्मवान- मंत्रकार  १२९. भागवती - गोत्रकार
१३०.  भार्गव - गोत्रकार  १३१.  भावन - भरगु के पुत्र   १३२.  भुवन - भरगु के पुत्र
१३३।  भूत - एक ब्रह्म ऋषि   १३४।  भरगु - मंत्रकार , गोत्रकार , परवरकार
१३५. भरगुदास - गोत्रकार  १३६- भौनव - भरगु पुत्र १३७. भ्र्स्तकायनी - गोत्रकार
१३८.मंद -(मुंड ) गोत्रकार  १३९।  मटवीगन्ध - गोत्रकार १४०- मथित - गोत्रकार
१४१. मर्क - शुक्र के पुत्र  १४२. मांडव्य - गोत्रकार  १४३ - माण्डुक - गोत्रकार १४४.  मानकायन -गोत्रकार
१४५. माण्डकायनी -माण्डुक का पुत्र  १४६. माण्डके -मंडूक का पुत्र
१४७. मारुत - गोत्र कार ऋषि वर्ग
१४८. मार्कण्डेय - गोत्रकार , इनका पुत्र वेदशिरा था , मूर्धन्या पत्नी थी ,वंशावली में इनकी पत्नी का नाम              धूमपानी का नाम ब्रह्मपुराण में बतलाया गया है।
१४९ - मार्गपथ - गोत्रकार  १५०- मार्गीय - गोत्रकार  १५१.  मालायनी - गोत्रकार
१५२.  मित्रेव - गोत्रकार , मैत्रेय ब्राह्मण तथा metryaani  शाखा के संचालक
१५३. मूर्ध्न - भरगु पुत्र.  १५४. मरकदू - धाता के पुत्र - म्नस्वनी इनकी पत्नी का नाम था
१५५.  मर्ग - (भूत ) गोत्रकार  १५६. मेत्रीय - गोत्रकार  १५७. मौज - गोत्रकार
१५८. मोदगलायन - गोत्रकार  १५९. यज्ञपति - गोत्रकार १६०. यज्ञ पीडायन - गोत्रकार
१६१. यास्क - (यक्सावल) - गोत्रकार  १६२. यागपि - गोत्रकार
१६३.  युन्दाजीत - मंत्रकार  १६४. रंजन - शुक्र वंसज , वारुणी का पुत्र
१६५. दामोद - गोत्रकार
१६६ रुरु - परमती का पुत्र - इनका विवाह स्थूलकेश मुनि की पुत्री  प्रमदवरा से हुआ , प्रमदवरा को सर्प ने
       डस लिया था , तब इसने अपनी आयु देकर उसको जीवित किया।  इनका सर्प जाती से द्वेष दुन्दुम के
       साथ संवाद आदि महाभारत में मिलते है
१६७. रूपी - प्रवर  १६८. देवेश - प्रवर  १६९। . रोकमायनी - गोत्रकार
१७०. रोहिल्यायनी - गोत्रकार ,
१७१ ललाटी , १७२।  लुब्ध , १७३ लोलाक्षी  १७४। लिक्षिण्य  १७५।  लोहवेरिन ( सभी गोत्रकार )
१७६. वजर्षिरस - भरगु पुत्र  १७७. वत्स - भर्गु गोत्री  १७८.  वृतिरिन् - शुक्राचार्य के पुत्र
१७९. वरणम् (विभ) भरगु पुत्र  १८०।  वसु - जन्मदग्नि पुत्र  १८१. वसुद - भरगु पुत्र
१८२. वानयानी - गोत्रकार ,  १८३.  वात्स्य - गोत्रकार  .  १८४. वाह्यान - गोत्रकार
१८५. विद - मंत्रकार एवं गोत्रकार  १८६. विदन्वत् भार्गव - शाम drstta -
१८७. विधाता -भरगु ख्याति पुत्र , इनकी पत्नी नियति थी
१८८.  विरुपाक्ष - गोत्रकार  १८९ - विश्वकर्मा तवस्ता तथा वैरोचनी यशोदा का पुत्र
१९०. १९०.  विस्वरूप - त्वष्टा का पुत्र , देवो का पुरोही , विरोचन का भांजा , असुरो से सम्बन्ध होने पर
        यज्ञ में देवो के सामने असुरो को गुप्त रीती से हमीमार्ग देता था , इंद्र ने अपनी पदवी छीन जाने
        के भय से इसके ३ मस्तक वज्र से काट दिए थे।  इससे विदित होता है की त्रिसिरस और विश्वरूप
        एक होगे.
१९१. विस्ववसु - जन्मदग्नि पुत्र  १९२.  वेद - मंत्रकार  १९३.  विष्णु - गोत्रकार
१९४.  वीतहव्य - गोत्रकार , मंत्रकार , एवं सूक्त दृसत्ता
१९५.  वेदसिरस - मार्कण्डेय के पुत्र इनकी पत्नी का नाम पावरी था.
१९६।   वेन भार्गव - सूक्त द्रष्टा  १९७।  वेकरनी , १९८. वेगयेन  १९९.  बेग्भ्यन्न  २००। वैश्वानरी
          वेहोनरी  २०१, व्याघाज्य ( सभी गोत्रकार )
२०२। वेदभि भार्गव - शुक्त दरिस्टता  २०३. व्य्जय् - भरगु पुत्र  २०४. वैश्रुव -भरगु पुत्र
२०५ ब्याज - भरगु पुत्र  २०६. वेक्श - प्रवर  २०७- वैदर्भी भार्गव = शुक्त डिर्स्टता
२०८।  वैन्य - मंत्रकार एवं गोत्रकार
२०९।  शण्डामर्क - षंड और मर्क ये दो पुत्र पुरषो के नाम है।  दोनों शुक्र के पुत्र थे , ये अशूरो के पुरोहित थे ,
          श्रेस्ट पुरोहित होने का कारण दैत्यों को पराभूत करना देवो के लिए कठिन कार्य था , इसलिए देवो ने
           लालच दिया और सोम के बहाने अपनी और देवो ने कर लिया।  जब यज्ञ शुरू हुआ तब
         संडाम्रक वहा उपस्थित हुए , किन्तु देवो के साथ उनको शोम पान  नही कराया गया और उपहास
         करके निकाल दिया।  शुक्रामंथी गृह लेने का प्रचार शण्डामर्क के लिए हुआ था।
२१०.  शकटाक्ष- गोत्रकार २११.  शाक्टायन - गोत्रकार २१२. शरदिवत्क - गोत्रकार
२१३. शाकल्प - मार्कण्डेय ऋषि का पुत्र था , ऋग्वेद संघिता के संधि नियम बनाने वाले
२१४. शर्कराक्षी - गोत्रकार  २१५।  शार्कराक्ष्य - शार्कराक्षी पुत्र
२१६.  शांगख - गोत्रकार २१७. शलयनि गोत्रकार  २१८.. शिखावरण - गोत्रकार
२१९. शुचि - भरगु पुत्र
२२०. शेनक भार्गव - गोत्रकार, मंत्रकार, तथा शुक्त dirstya
२२१. शोनहोत्र - गुत्स्मद का पैतृक नाम
२२२.  शोकायन जीवंती - गोत्रकार  २२३।  शर्म दागोपी - गोत्रकार
२२३. श्रवा - भरगु पुत्र  २२४ शर्म दगोपी - गोत्रकार
२२५.  श्री लक्ष्मी - भरगु ख्याति की पुत्री।  भगवान विष्णु की पत्नी
२२६. संगालय  २२७।  सनक  २२८.  शंक्त्य  २२९. शय्याणी  २३०. शापि ( सभी गोत्रकार )
२३१. सवन - भरगु पुत्र  २३२।  स्वेशरम - मंत्रकार  २३३.  सुनन - भरगु पुत्र
२३४. शारस्वत - मंत्रकार , वेदविद्या में पारंगत थे , सरस्वती से उतपन दधीचि के पुत्र
२३५.  सुचेतम - वीतहव्य वंशावली में आये हुए गुत्स्मद के पुत्र
२३६. सुन्न  २३७. सुजन्य ( दोनों भरगु पुत्र )
२३८.  सुमति भार्गव - इनको अपने दस हज़ार पूर्व जन्मो की स्मृति थी , अपने पिता को ज्ञान दिया था
२३९.  सुमित्र बयषद् - मंत्र दृसत्ता ऋषि २४०. सुषेण - जन्मदग्नि पुत्र
२४१.  शोकी - गोत्रकार  २४२।  सोमाहुति भार्गव- सूक्त दृसत्ता ऋषि
२४३. शोचरक  २४४।  शोधिक  २४५. सौर  २४६।  सौरी  २४७।  सौह  २४६ स्तनित २४९. स्थपिण्ड
        २५०।  हंसजिव्ह ( सभी गोत्रकार )
२५१. स्वनवात।  शुक्र के वंसज  दियुतिमान के पुत्र थे
२५२. स्थूम्रश्मि - भार्गव - सूक्त डिर्स्टता  २५३।  स्वमूर्ध्न।  - भरगु पुत्र

साभार - भर्गु वंश गाथा।
       




Bhirguvanshi Brahman ( Yuvk - Yuvti ) Parichay Smmeln..

   आदरणीय स्वजाति बन्धुवर
   नमस्कार।
 आपको जानकर यह अति प्रसन्नता होगी की भारत की राजधानी दिल्ली में सामाजिक सशक्तिकरण , हेतु प्रयास जारी है , तथा कुछ रूढ़िवादी परम्पराओ को खत्म करने की
दिशा में विवाह योग्य युवक युवतियों के लिए वैवाहिक परिचय के उद्देश्य से अभिभावकों की उपस्तिथि में
" युवक - युवती परिचय सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है।  सम्मेलन में कई  प्रांतो से युवक युवतियां
अविभावकों के साथ आने की प्रबल सम्भावना है। जिसमे समाज के होनहार बच्चे शिक्षित , बेरोज़गार ,व्यवसायी इत्यादि सम्मिलित होने जा रहे है , यही अवसर है की इसमें  हिस्सा लेकर अविभावक अपने बच्चों के लिए योग्य वर ,वधु का चयन करते हुए भृगुवंशी इतिहास में एक नई रौशनी , नई मिसाल कायम कर सकेंगे।
              ात: आप सभी समाजबंधुओं से अनुरोध है की आप इस शुभ अवसर का फायदा उठाये और
आमंत्रण स्वीकार करते हुए , विवाह योग्य युवक युवतियों को साथ लेकर पधारे , और समाज के इस  अवसर का लाभ उठाये। :::-
कार्यक्रम।   ९ब्जे सुबह से शाम ५ बजे तक                                      आयोजन स्थल
९. . भरुवन्दना एवं पुष्प अर्पण                                 श्री सनातन ,धर्म मंदिर , चाणक्य प्लेस, पंखा रोड
दोपहर  १ बजे.   भोजन।                                 ४० फ़ीट रोड।  माता चानन देवी हॉस्पिटल के सामने ,
                                                                    C.1. जनकपुरी  नई दिल्ली ५९
मुख्य अतिथि।  श्री रतन लाल भार्गव ( Addl. Supdt.of Police , TONK ( Rajsthan ,
विशिस्ट अतिथि। श्री महेश शर्मा , मेरठ , निदेशक , रिस्तो का संसार , मेरठ
      "                  श्री  डी-आर - शर्मा  उत्तम नगर. दिल्ली 
                                                                             विशेस सहयोगी एवं परामर्श दाता                                                                                 श्री कुञ्ज शर्मा , श्री राहुल जोशी शिवपुरी , श्री c.p . जोशी भोपाल, श्री अनिल शर्मा दमोह ,श्री अशोक कुमार जोशी शिव पूरी , श्री कमलेश कुमार शर्मा जयपुर , श्री लोकेश भार्गव अधिवक्ता ,
श्री कन्हिया लाल शर्मा बछरावा , राय बरेली।  श्री आनंद रावल , श्री सुरेश कुमार , श्री विनोद भार्गव पंजाब ,
श्री महावीर प्रशाद  गगन , श्री सुरेश कुमार शास्त्री , श्री एच। पी। जोशी , श्री ए के जोशी इंजीनियर। ,
श्री कुलदीप डागर , श्री भवानी शंकर जयपुर , श्री वासुदेव जी , श्री गिरीश भार्गव , श्री मुकेश महाराज ,
श्री दलीप जी जोशी , श्री राकेश जी , श्री गौरव घोषिल जयपुर , श्री महेंदर शर्मा उज्जैन , श्री सुनील जोशी
भोपाल , श्री दिनेश जी उज्जैन , श्री पंडित दर्शन जी , श्री दिनेश जी जॉल , श्री महेश जोशी भोपाल ,
श्री अनिल जी , श्री राजेश जी आगरा , श्री अशोक जोशी adv दिल्ली , श्री एल डी जोशी adv .इंदौर ,
श्री दिनेश शर्मा दिल्ली , श्री विजय जी कायस्थ नारनौल , श्री नरेंदर शर्मा ओडिशा , श्री अनुराग शर्मा
उरई ,जालों , श्री सीता राम जी परियाल जयपुर , श्री नीरज कुमार कौशिक बिजनौर , श्री राजेंद्र शर्मा
भोपाल, श्री अजय गौड़ कलिम्पोड दार्जिलिंग , श्रीहरिश जी गांव हर्षाली अहमदाबाद , श्री संतलाल जी
पलवल , श्री योगेश जोशी मुरैना , श्री अरविन्द शर्मा जयपुर , श्री सुरेंदर शर्मा टोंक , राजस्थान ,
श्री राजेंदर भार्गव , भिवानी , श्री विनोद भृगुवंशी , श्री दिनेश शर्मा जयपुर
एवं। . सभी समस्त प्रांतो की कार्यरत संस्थाएं। .( जो प्रांतो की कार्यकारिणी के प्रधान भाग लेंगे विशिस्ट
अतिथि होगे.                                                                       बी:एस :शर्मा { मुख्य संस्थापक } 
                                                                           संयोजक समिति ,भृगुवंशी ,(ज्योतिषी ब्राह्मण )
                                                                            युवक युवती परिचय सम्मेलन दिल्ली।                                                                                                  
                                                                                           
                                                                                     


                                           
         भृगुवंशी ( ज्योतिषी ब्राह्मण ) युवक युवती परिचय सम्मेलन
                                                      दिनांक।  २२ मई ,२०१६
                                          सनातन धर्म मंदिर ,चाणक्य प्लेस,नई दिल्ली। ५९
बन्धुवर
                  वक्त के बदलते परिवेश में जिस प्रकार हम लोग सौन्दर्य प्रशाधन एवं विलासिता की ओर बढ़ रहे है
घर की रसोई एवं बेड रूम की सभी वस्तुओं को वर्तमान युग में बदल रहे है ,ठीक उसी प्रकार हमारा धयान
समाज की रूढ़िवादी परम्पराओ को खत्म करने एवं समाज हित में सामाजिक  कार्य करने की और भी ध्यान देना चाहिए।  आज युवक युवती परिचय सम्मेलन उसी कड़ी की एक छोटी से भेट आपको मिल रही है , आशा है आप इससे सहमत होते हुए , समाज हित में एक दृस्टि कोण बना कर आगे बढ़े , जिससे हमारी भावी पीढ़ी को लाभ मिले और रूढ़िवादी परम्पराओ को खत्म भी करें/ .
              वर्तमान में देखा जाए तो इस प्रकार के आयोजन समय की पुकार है , हमे इसके फायदे अनेक और हानि नाम मात्र भी नहीं , सभी लोग गुनगुनाते रहते है की  " हम क्या थे , क्या हो गए , आगे क्या होगे अभी ,
ाऔ  बैठकर विचारे इस मसले को सभी '
             आप जानते है , देखा है , महसूस किया है ,सुना भी है की सभी अविभावक विवाह योग्य बच्चों के
संबंधों के लिए चिंतित रहते है , उन्हें गाव - गाव , शहर ,शहर घूमने के उपरांत भी संबंध बनाने में कठिनाई
आती है।, यहाँ तक की इस उधेड़ बुन के चक्रव्यूह में लाखो रूपये खर्च भी हो जाते है।  परिणाम इतना सब
करने के  उपरान्त भी बच्चों के अनुरुप संबंध नहीं हो पाते , जिसके बच्चे हक़दार है , केवल समझौता करना ही
एक मकसद बन जाता है।   यह स्वाभाविक है की बच्चे अपने अनुरुप जीवन साथी भी चाहते है ,ऐसे आयोजन हमारी उन सभी आकांक्षाओं में मदद कर सकते है।
              आज आपके सामने प्रयास किया गया है की आयोजन में नौकरी पेशा वर्ग , व्यवसाई ,डिग्री
होल्डर सभी वर्ग के बच्चे सम्मिलित हो , और अपने अनुरुप जहां भी जिसकी सेटिंग बनती है , जीवन साथी का
चुनाव एक ही छत के निचे , एक मंच पर बैठ क्र हो जाए। इन सब बातो को एक सूत्र में देखते हुए , फैसला
किया गया की दिल्ली में युवक युवती परिचय सम्मेलन किया जाए , जो आज आपके सामने होने जा रहा है।
किसी ने  कहा है की :: -  मुस्किले चाहे लाख हो ,लेकिन एक दिन तो हल होती है ,
                                     ज़िंदा लोगो की दुनिया में अकसर हलचल होती है  ::::::

            आप सभी जानते है की हमारे बिच में ऐसे लोग , कार्यकर्ता विराजमान है जो समाज हित के
कार्यो से जुड़े हुए है , लेकिन हम उन खास कार्यो पर फॉक्स नहीं क्र पाते , जिसकी वर्तमान में जरूरत है ,
सामूहिक विवाह सम्मेलन भी उसका एक हिस्सा है।  कुछ लोग मंदिर धर्मशालाओं पर भी अपना ध्यान
लगाए हुए है , ये सभी कार्य समाज हित में कहे जा सकते है ,परन्तु सभी लोगो को इनका भरपूर फायदा
नहीं मिल पा रहा , क्योकि सामूहिक विवाह सम्मेलनों में मिडिल इनकम ग्रुप के बच्चे कम देखे गए है ,
सी प्रकार धर्मशाला और मंदिर
से भी  सभी लोग लाभान्वित नहीं हो पाते , वो स्थानीय लोगो का या फिर कुछ कार्यकर्ता ही उसका
फायदा उठा पाते है , खैर वक्त आ गया है की अब हमे विचारों को नया आयाम देने का , नए नए सोर्स
पैदा करने का , जिससे समाज के लोग ज्यादा से ज्याद लाभान्वित हो सके।  यह तभी हो सकता है की
हम सभी एक मत होकर  एक  " जनून  " बनाकर  नई मुहीम को जन्म देकर  एक नया  इतिहास लिखने का
प्रयास करें , २१ वि शदी में रूढ़िवादी परम्पराओ का खात्मा करते हुए भावी पीढ़ी के लिए कुछ ऐसे पोधे
लगाते  चले , जिससे भावी पीढ़ी को उसका भरपूर फायदा मिल सके , यह तभी होगा जब समाज के कार्यो में
हमारी एक विचारधारा बन पायेगी।  इसमें दो राय नहीं की युवा पीढ़ी सभी पढ़ लिख क्र एक सर्जनात्मक पहल
को जन्म  देकर आगे बढ़ रहे है , और अविभावक भी उनके साथ कंधे से कन्धा मिलाकर उनके सपने को
साकार करने हेतु करत संकल्प होते दिखाई दे रहे है।
कुछ पंक्तिया आपको कहना चाहुगा  : -
      मिलेगी मंजिले हमे तू कुछ करने के लिए आगे तो बढ़ ,
      कुछ रिस्क लेकर " जज्बा " बना , अपनी कह दूजे की सुन ,
      एक दिन लग जाएगा पौधा + शंकाओं " के किले मत बाँध ,  समाजहित  में  बढ़ चल ,
      आज नहीं तो कल महकेगा चमन , खिलेगा कमल ,  नित नई बहार बनकर ,
      न तू , फल खाने की आश लगा , समय की पुकार माली बदलते रहते है ,
      पौधा लगाता कोई , खाता कोई ,  चक्रव्यूह से निकल , कुछ आगे बढ़ और सोच ,
     इत्मीनान रख ,  जो  खायेगा , वो भी तो कोई गैर नहीं , सभी अपने ही तो है "
बन्धुवर
            हम सभी मिलकर आज यह एक नई पौध @ युवक युवती परिचय समिति " के रूप मेंलगाने जा रहे
है , जिनका उद्देश्य एक ही छत के निचे दो दिलो का संगम , उनके विचारों के अनुरुप , उनकी भावनाओ के अनुरुप  हो जाए ,  इससे बड़ी उपलब्धि और क्या हो सकती है , इसे समाज हित में एक नई स्फूर्ति , सर्जनात्मक पहल का जन्म होगा , आगे आने वाली पीढ़ी को निसंदेह अच्छे फल खाने को मिलेंगे।
नमस्कार                                                                  

                                                                        ::::::::::                          ( बी. एस. शर्मा  )
                                                                                                         मुख्य  संस्थापक
                                                                                                  भृगुवंशी ,ज्योतिषी ब्राह्मण ,युवक
                                                                                                      युवती परिचय समिति ,दिल्ली




Monday, May 2, 2016

                     भृगुवंशी ( ज्योतिषी ब्राह्मण ) युवक युवती परिचय सम्मेलन , दिल्ली
                                                                                 दिनांक. २२ मई ,२०१६
                         बन्धुवर ,
                                      आपको जानकर अति प्रसन्नता होगी की भारत की राजधानी दिल्ली में ,
सशक्ति करण हेतु प्रयास जारी है , तथा कुछ रूढ़िवादी परम्पराओ को खत्म करने की दिशा में, प्रयास
हेतु ,विवाह योग्य युवक युवतियों के लिए वैवाहिक परिचय के उद्देशय से अविभावकों की उपस्तिथि में
एक परिचय सम्मेलन किया जा रहा है।  सम्मेलन में सभी प्रांतो से युवक युवतियों  के आने की प्रबल सम्भावना है , जिसमे समाज के होनहार बच्चे शिक्षित , बारोजगार ,व्यवसायी ,नौकरी रत ,सम्मिलित
होने जा रहे है , यही अवसर है की इसमें हिस्सा लेकर अविभावक अपने बच्चों हेतु वर , वधु का चयन करते हुए भृगुवंशी इतिहास में एक नई रौशनी , नई मिशाल कायम कर सकेंगे।
कार्यक्रम सुबह ९ बजे से शाम ५ बजे तक होगा।                                  आयोजन स्थल
सुबह। ९ बजे।  भृगु वंदना एवं ( सांस्कृतिक कार्यक्रम )             श्री सनातन धर्म मंदिर ,चाणक्य प्लेस
( शर्मा एंड पार्टी  द्वारा )                                                      ४० फ़ीट रोड़ , ( नजदीक सी -१ जनकपुरी
भोजन - १ बजे से २ बजे तक                                                  नई दिल्ली - ११००५९
( बाकी समयानुसार , समिति द्वारा पटल पर घोषित )

मुख्य अतिथि :-  श्री रतन लाल भार्गव ,(Addl .Supdt . of Police , TONK , ( Rajasthan )
विशिस्ट अतिथि।  श्री महेश शर्मा ( मेरठ ) निदेशक रिस्तो का संसार 
        "                 श्री डी : आर : शर्मा ( बिल्डर ) उत्तम नगर।  
                          सभी प्रांतो के रहने वाले भृगुवंशी ब्राह्मणो से निवेदन है की वे विवाह योग्य 
बच्चों सहित सम्मेलन में पधार कर आयोजन की शोभा बढ़ाए।  
                                                                                                
किसी भी पूछताछ के लिए निम्न नंबरों पर बात की जा सकती है  
मुख्य संयोजक।  बी. एस : शर्मा  ९८१०७१००३४ 
सह संयोजक।  नरेश कुमार शर्मा। ९९९०८१२६४९ 
केशियर। केदार नाथ   ८८६०६३५९३६                                                      निवेदक 
                                                                                                    संयोजक समिति                                                                                                                                   
                                  

Friday, March 4, 2016

       किसी भी शब्द की महता उन शब्दों का सार समझने से होता है , न की जो शब्द प्रचलित है या
प्रतिदिन व्यवहार में आते है , परन्तु यदि उन शब्दों का गहराई से अध्यन या मनन किया जाये तो
स्तिथि में सुधार किया जा सकता है।
            यहाँ आपके सामने आज दो शब्दों के बारे में अपने कुछ विचार रख रहा हु ,आशा है आप सभी
अपनी सकारात्मक सोच के साथ इन शब्दों के सभी पहलुओ पर अपने विचार रख कर आगे बढ़ेंगे।
आपके सामने  सबसे पहले " पुलिस " शब्द के विषय में कुछ कहना चाहुगा. यह शब्द एक ऐसा शब्द है जिसे  कुछ लोग इसे ठीक नही समझते , क्योकि कहा  जाता है की बद  अच्छा और बदनाम बुरा।
२. दूसरा शब्द मै लेना चाहुगा  " dakot " ( डाकोत ) जो की एक जाती विशेस का बोध करता है , यह शब्द भी या यह जाती भी लोगो की नजरो में शनि दान लेने के कारण प्रचलित है , जिस प्रकार  " POLICE " शब्द में उसके गुण छिपे हुए है , उसी प्रकार " Dakot " शब्द भी गुणों से भरपूर है।  उनकी व्याख्या मै निम्न प्रकार करता हु.
१. POLICE  , शब्द English  के ६ शब्द मिलकर  बना है।
१. P .......... Polite
२. o ...........obedient
३. l ......... Loyal
 4..i ......... Intellegent       ५. .च........   clever .        ६. e. ........Efficient ....... अर्थात  पुलिस अफसर में ये उपरोक्त सभी गुण मौजूद होने चाहिए ,तभी वह एक अच्छे पुलिस अफसर की श्रेणी में आता है ,ज्यादार में ये सभी गुण पाये जाते है , जो भटक जाते है , उन की वजह से ही पुलिस महकमा बदनाम हो जाता है।
             ठीक इसी प्रकार  " dakot " जाति , शब्द भी ५ अक्षरो से मिलकर बना है, जिसकी व्याख्या भी इस तरह से करता हु।
१. d ..........  dedicate ...........  २. a .........  active ......  ३. k .......  kind .......
४. o ..........  obedient
५. t ........     tactful ..... अर्थात डाकोत जाती के लोगो में भी उपरोक्त सभी गुण होने चाहिए ( होते भी है )
परन्तु कुछ लोग जो इन गुणों से भटक जाते है , वो जाती उनके कारण सभी पर या शब्दों पर प्रश्न चिन्ह लग जाता है।  ठीक उसी प्रकार जैसे ऊपर पुलिस शब्द के बारे में लिखा है. , .
                                                                                   
                                                                                ( बी. एस.शर्मा )
                                                                                       दिल्ली


                                                 
                                      

Tuesday, February 2, 2016

                                    +  शनि दान +
                                     आजकल महिलाओ ने शनि शिगनापुर में शनि चबूतरे पर पूजा करने के लिए
                      आंदोलन किया जा रहा है , इस पर सरकार या धर्मगुरु , विचारक क्या फैसला देते है ,वो
                       तो आगे की बात है।  परन्तु  शनि दान किसको दिया जाए , जिससे दानदाता को कस्टो
                      के  निवारण से मुक्ति मिले।
                                      कहा जाता है की शनि दान : डाकोत  : को देने से ही कस्टो में निवारण होता है
                      क्या ; कोई पंडित , पुजारी , शनि पुजारी ,इस पर प्रकाश डालेंगे , की डाकोत में कौन सी
                      ऐसी शक्ति है , जो दानदाता को कस्टो में फायदा हो जाता है।
                      २. क्या डाकोत के पास कोई देवीय शक्ति है ,जो इस प्रकार की धारणा  बनी हुई है..
                                                       ...........                          ..........
                                                                                     ( बी. एस. शर्मा  )

Friday, January 1, 2016

बंधुवर ,
           नमस्कार ।
                  भरगु भवन ,(धर्मशाला ) एवं मंदिर जिसे आप लहलहाता हुआ देख रहे हो , यह आपके द्वारा
किया हुआ सहयोग ,का भृगु स्तम्भ है , जिसे हमारी भावी पीढ़ी पूर्वजो की धरोहर के रूप में देखेगे। पूरा समाज गौरान्वित है : अखिल भारतीय भृगुवंशी ब्राह्मण महासभा , दिल्ली के तत्वाधान में यह कार्य
सम्पूर्ण हुआ।
                 आज इस शुभ अवसर पर सभी भरगुवंशियो एवं महासभा के पदाधिकारियों से निवेदन करना चाहुगा की हमारा पहला कदम भवन निर्माण का पूर्ण हुआ , अब हमे , दिल्ली में कुछ सामाजिक कार्य करने की आवश्यकता है , जो हमारा महासभा का कर्तव्य भी है ,तथा उसके सविधान में भी है।  अभी तक तो यह कह कर हम लोग , महासभा के लोग पीछा छुड़ा लेते थे की मंदिर निर्माण को पूरा होने दो , बीच में टांग न अड़ाओ , अर्थात रोड़ा मत बनो , अब संस्था , महासभा के पास कोई भी बहाना नही होगा , नही ही चलेगा ।
अत  अब हमे एक जुट होकर शोशल कार्य ( सामाजिक कार्यो) की और धयान देने होगा.
१.    सबसे पहले सामाजिक कार्यो में जरूरत है की यहाँ पर एक युवक -युवती परिचय सम्मेलन हो ।
२. दूसरा सामाजिक कार्य यहां पर सामूहिक विवाह सम्मेलन जैसे , राजस्थान , मध्य प्रदेश में होते है
    किये जाये.
३. मेरे पास एक और सुझाव भी आया है , कुछ सहयोग देने का भी वादा किया है , वो है की * हरिद्वार में
   समाज का एक मंदिर बनाया जाया।
   बंधुवर , उपरोक्त तीनो सुझाव आपके सामने रख दिए , गए है , सभी प्रकार की सिथति आपके सामने
है , फैशला आपने करना है , करना चाहिए की पहले इन तीन कार्यो में किसको परेफरेंस देकर (प्रायोरिटी)
बना कर किया जाये ।
                              आप सभी इस विषय पर अपना मत देवे , ताकि उसी के अनुसार , प्लानिंग बनाकर
महासभा के पदाधिकारी गण उस पर विचार विमर्श करेंगे और कार्य को आगे बढ़ाते हुए फाइनल प्रपोजल
आपके सामने रखेंगे ।
                                                                            ( बी.एस. शर्मा  )
                                                                                 दिल्ली
                                                                             ९८१०७१००३४
                                                                संस्थापक सदस्य , एक्स प्रेजिडेंट
                                                        अखिल भारतीय भरगुवांशी ,ब्राह्मण , महासभा ,
                                                                                  दिल्ली